कैपिटल फ्लो (पूंजी का आना-जाना) क्या है?
अर्थव्यवस्थानिवेश के लिए एक देश से दूसरे देश में जाता पैसा। पैसा आने (इनफ्लो) से करेंसी आमतौर पर मजबूत होती है; पैसा निकलने (आउटफ्लो) से कमजोर।
ऐसे समझिए: पैसे का ज्वार-भाटा, जो आता भी है और लौटता भी है।
असली उदाहरण: 2013 के “टेपर टैंट्रम” में भारत, ब्राजील, तुर्की और इंडोनेशिया जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकला और उनकी करेंसी गिर गईं।
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