पूरा लेसन
फोन टूट जाता है, नौकरी छूट जाती है, कोई बीमार पड़ जाता है। इमरजेंसी फंड वह कैश है, जो सिर्फ ऐसी अचानक आई मुसीबतों के लिए अलग रखा जाता है।
एक आम लक्ष्य: जरूरी खर्चों के 3 से 6 महीने के बराबर रकम। फ्रीलांसर, या जिन परिवारों में एक ही कमाने वाला है, वे अक्सर इससे ज्यादा का लक्ष्य रखते हैं।
उदाहरण: अगर जरूरी खर्च महीने के 800 हैं, तो 2,400 से 4,800 तक का लक्ष्य रखें। पहला लक्ष्य एक महीने के खर्च का बनाएं। इतना भी जमा हो, तो मुसीबत की घड़ी कहीं हल्की लगती है।
इसे सुरक्षित और ऐसी जगह रखें, जहां से तुरंत निकाला जा सके: अलग सेविंग्स अकाउंट या मनी मार्केट फंड। शेयर, क्रिप्टो या ट्रेडिंग अकाउंट में नहीं, क्योंकि ठीक जरूरत के वक्त ये नीचे चल रहे हो सकते हैं।
असली सबक: 2020 में लॉकडाउन शुरू होते ही लाखों लोगों की कमाई लगभग रातों-रात रुक गई। जिनके पास बचत का सहारा था, वे इंतजार कर सके; बाकियों को ऊंची ब्याज दर पर उधार लेना पड़ा या निवेश सबसे निचले भाव पर बेचने पड़े।
- आम गलती
गलती: सेल या छुट्टियों के लिए इसमें से पैसा निकालना। नया फोन इमरजेंसी नहीं है। और अगर इसे इस्तेमाल करना पड़े, तो सबसे पहले इसे दोबारा भरें।
- मुख्य बात
निवेश या ट्रेडिंग से पहले इमरजेंसी फंड बनाएं। बाकी सब कुछ इसी नींव पर खड़ा होता है।
झटपट जांच
- इमरजेंसी फंड का आम लक्ष्य होता है…
- 3 से 6 महीने का खर्च
- 1 हफ्ते का खर्च
- 5 साल का खर्च
- इसे कहां रखना चाहिए?
- सुरक्षित जगह, जहां से तुरंत निकल सके
- क्रिप्टो में, ताकि तेजी से बढ़े
- किसी एक मजबूत कंपनी के शेयरों में
- इसे कब बनाएं?
- जोखिम वाले निवेश से पहले
- कार खरीदने के बाद
- कभी नहीं, इसकी जरूरत ही नहीं
- इनमें असली इमरजेंसी कौन-सी है?
- नौकरी छूट जाना
- स्नीकर्स पर बड़ी सेल
- किसी दोस्त का घूमने का प्लान