पूरा लेसन
हर केंद्रीय बैंक में बाज भी होते हैं और कबूतर भी। बाज (हॉक) को सबसे ज्यादा डर महंगाई का होता है और उसका झुकाव ऊंची ब्याज दरों की ओर रहता है। कबूतर (डव) को सबसे ज्यादा डर नौकरियां जाने का होता है और उसका झुकाव कम ब्याज दरों की ओर रहता है।
दोनों में मतभेद इसलिए होता है, क्योंकि फेड के दो लक्ष्य हैं: कीमतों में स्थिरता और ज्यादा से ज्यादा रोजगार। जब ये दोनों अलग-अलग दिशा में खींचते हैं, तो हर सदस्य इन्हें अलग वजन देता है।
बाजार हर शब्द ध्यान से सुनता है। “आगे और बढ़ोतरी सही रहेगी” सख्त रुख (हॉकिश) जैसा लगता है। “हम धैर्य रख सकते हैं” नरम रुख (डोविश) जैसा। ट्रेडर हर बयान की तुलना पिछले बयान से करते हैं।
मई 2013 में फेड प्रमुख बेन बर्नांके ने इशारा किया कि फेड जल्द ही बॉन्ड खरीद धीमी कर सकता है। सख्त रुख का यह सरप्राइज “टेपर टैंट्रम” के नाम से मशहूर है। इसकी वजह से सितंबर तक अमेरिका की 10 साल की यील्ड करीब 1.6% से बढ़कर करीब 3% हो गई।
आम सिलसिला: सख्त रुख का सरप्राइज, ऊंची यील्ड, मजबूत करेंसी। 2013 में पैसा तेजी से अमेरिका लौटा, और भारतीय रुपया और इंडोनेशियाई रुपिया तेजी से गिरे। नरम रुख का सरप्राइज इसका उल्टा असर करता है।
- आम गलती
भ्रम: “बाज ही विलेन हैं।” बाज आपके पैसे की खरीदने की ताकत बचाते हैं, कबूतर नौकरियां। दोनों जरूरी हैं, और ज्यादातर अधिकारी आंकड़े बदलने के साथ पाला बदलते रहते हैं।
- मुख्य बात
बाज: महंगाई से लड़ने के लिए ऊंची ब्याज दरें। कबूतर: नौकरियों को सहारा देने के लिए कम ब्याज दरें। बाजार सबसे ज्यादा तब हिलता है, जब लहजा उसे चौंका दे।
झटपट जांच
- सख्त रुख (हॉकिश) वाला केंद्रीय बैंक किस ओर झुकता है?
- ऊंची ब्याज दरें
- कम ब्याज दरें
- ब्याज दरें शून्य पर रखना
- नरम रुख का सरप्राइज आमतौर पर उस करेंसी को…
- कमजोर करता है
- मजबूत करता है
- बिल्कुल वैसा ही रखता है
- “कमेटी धैर्य रखेगी” कैसा सुनाई देता है?
- नरम रुख (डोविश)
- सख्त रुख (हॉकिश)
- हमेशा तटस्थ
- महंगाई ऊंची है और लगभग सबके पास नौकरी है। बहस आमतौर पर कौन जीतता है?
- बाज
- कबूतर
- जो आखिर में बोले
इस लेसन के शब्द
बाजार हिलाने वाली खबरें
- इकोनॉमिक कैलेंडर
- नॉन-फार्म पेरोल (NFP)
- महंगाई कैसे मापी जाती है
- FOMC का दिन
- बाज और कबूतर
- भाव में पहले से शामिल