इकोनॉमिक कैलेंडर
इस हफ्ते और आने वाले हफ्तों की हर बाजार हिलाने वाली आर्थिक रिपोर्ट और केंद्रीय बैंक की बैठक, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और कई दूसरे देशों के लिए, आपके अपने टाइम जोन में, संभावित असर, अनुमान और पिछले नतीजे के साथ। बड़े आंकड़े भावों को तेजी से हिला सकते हैं: जानें कि वे कब आने वाले हैं।
सिर्फ सीखने के लिए, निवेश की सलाह नहीं। भाव आपके ब्रोकर के भाव से अलग हो सकते हैं। लीवरेज के साथ ट्रेडिंग में जोखिम ज्यादा है और ज्यादातर नए ट्रेडर पैसा गंवाते हैं। जोखिम की चेतावनी
इकोनॉमिक कैलेंडर क्या है?
इकोनॉमिक कैलेंडर में उन आर्थिक रिपोर्टों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और भाषणों की तारीख और समय की लिस्ट होती है जो करेंसी, शेयर और सोने को हिला सकते हैं। ट्रेडर हर हफ्ते इसे देखते हैं, ताकि भाव में अचानक उछाल से हैरानी न हो। बुनियादी बातें इकोनॉमिक कैलेंडर लेसन में सीखें।
कैलेंडर कैसे पढ़ें
- ऊपर की पट्टी में कोई दिन चुनें: बिंदु दिखाते हैं कि उस दिन ज्यादा असर वाले कितने इवेंट हैं। ऊपर का कार्ड अगले ज्यादा असर वाले आंकड़े तक का काउंटडाउन दिखाता है।
- फिल्टर से सिर्फ अहम इवेंट या उन देशों के इवेंट देखें जिनकी करेंसी में आप ट्रेड करते हैं, और असर, अनुमान, पिछला नतीजा और उसे समझाने वाला लेसन देखने के लिए किसी इवेंट पर टैप करें।
- समय आपके डिवाइस के टाइम जोन में दिखता है। न्यूज साइटों से मिलाने के लिए UTC पर स्विच करें।
- करेंसी वह करेंसी है जिस पर इवेंट का सबसे ज्यादा असर होता है (अमेरिकी आंकड़ों के लिए USD, यूरोजोन के लिए EUR)।
- असर उस करेंसी पर होने वाला संभावित असर है: ज्यादा (अक्सर भाव तेजी से हिलाता है), मध्यम, कम, या छुट्टी (कम कारोबार, बैंक बंद)।
- अनुमान वह है जिसकी अर्थशास्त्री उम्मीद करते हैं। पिछला पिछली बार का नतीजा है। जब असल आंकड़ा अनुमान से काफी अलग होता है, तो भाव अक्सर हिलते हैं। इसी को अनुमान से अंतर (सरप्राइज) कहते हैं। और पढ़ें: अनुमान और असल।
अहम इवेंट और ये आमतौर पर बाजार को कैसे हिलाते हैं
ब्याज दर के फैसले (फेड, ECB, बैंक ऑफ इंग्लैंड, बैंक ऑफ जापान, बैंक इंडोनेशिया…)
सबसे अहम इवेंट यही हैं। उम्मीद से ऊंची ब्याज दर आमतौर पर करेंसी को मजबूत करती है; कटौती या नरम रुख उसे कमजोर करता है। अक्सर फैसले से ज्यादा अहम उसके साथ आया बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस होते हैं। लेसन: FOMC का दिन और बाज और कबूतर।
महंगाई (CPI)
खुदरा कीमतों की एक साल पहले से तुलना। अनुमान से ज्यादा महंगाई से ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है, जिससे आमतौर पर करेंसी चढ़ती है। लेसन: महंगाई कैसे मापी जाती है।
अमेरिका की जॉब्स रिपोर्ट (नॉन-फार्म पेरोल, NFP)
आमतौर पर महीने के पहले शुक्रवार को, न्यूयॉर्क समय के मुताबिक सुबह 8:30 बजे। नौकरियों में अच्छी बढ़त अक्सर अमेरिकी डॉलर को ऊपर ले जाती है; कमजोर रिपोर्ट अक्सर उसे कमजोर करती है। लेसन: नॉन-फार्म पेरोल (NFP)।
GDP
पिछली तिमाही के मुकाबले अर्थव्यवस्था का आकार। उम्मीद से तेज ग्रोथ आमतौर पर करेंसी को सहारा देती है। लेसन: GDP में क्या-क्या गिना जाता है।
PMI, खुदरा बिक्री और कॉन्फिडेंस सर्वे
कारोबार और खरीदारों का हाल बताने वाले शुरुआती संकेत। 50 से ऊपर का PMI बताता है कि कारोबारी गतिविधि बढ़ रही है। इनसे अक्सर ऊपर वाली रिपोर्टों के मुकाबले छोटी और कम देर की चाल आती है।
खबरों के आसपास ट्रेडिंग के टिप्स
- ट्रेड खोलने से पहले कैलेंडर देखें, और वीकेंड से पहले फिर से।
- ज्यादा असर वाले आंकड़े के बाद के कुछ सेकंड में स्प्रेड बढ़ जाते हैं और भाव आपके स्टॉप लॉस के पार उछल सकते हैं।
- कई नए ट्रेडर ज्यादा असर वाले इवेंट से 15 मिनट पहले और 15 मिनट बाद तक कोई नया ट्रेड खोलते ही नहीं।
- असली पैसा दांव पर लगाने से पहले “आंकड़े आ गए!” और “फेड का दिन” गेम में आंकड़े पढ़ने की प्रैक्टिस करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इकोनॉमिक कैलेंडर में ज्यादा असर का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि यह इवेंट पहले भी उस करेंसी को तेजी से हिलाता रहा है, जैसे ब्याज दर के फैसले, CPI महंगाई और अमेरिका की जॉब्स रिपोर्ट। मध्यम और कम असर वाले इवेंट आमतौर पर छोटी चाल लाते हैं। असर एक अंदाजा है, वादा नहीं: कम असर वाली रिपोर्ट में भी बड़ा सरप्राइज भाव हिला सकता है।
NFP कितने बजे आता है?
अमेरिका की जॉब्स रिपोर्ट (नॉन-फार्म पेरोल) आमतौर पर महीने के पहले शुक्रवार को न्यूयॉर्क समय के मुताबिक सुबह 8:30 बजे जारी होती है। गर्मियों (डेलाइट सेविंग टाइम) में यह 12:30 UTC और सर्दियों में 13:30 UTC होता है, यानी भारतीय समय (IST) के मुताबिक शाम 6 बजे और शाम 7 बजे। कैलेंडर इसे आपके अपने टाइम जोन में दिखाता है।
असल आंकड़ा अनुमान से अलग होने पर भाव क्यों हिलता है?
भावों में पहले से वह शामिल होता है जिसकी ट्रेडर उम्मीद करते हैं (अनुमान)। सिर्फ सरप्राइज, यानी असल आंकड़े और अनुमान का अंतर, नई जानकारी होती है, इसलिए वही बाजार को हिलाता है। अनुमान से मेल खाने वाली रिपोर्ट से अक्सर बहुत कम बदलाव होता है।
कौन-से इवेंट सोने को हिलाते हैं?
सोने का भाव अमेरिकी डॉलर में तय होता है, इसलिए अमेरिकी इवेंट सबसे ज्यादा मायने रखते हैं: फेड के ब्याज दर के फैसले, CPI महंगाई और जॉब्स रिपोर्ट। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें या मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने पर दबाव डालते हैं; दरें घटने के संकेत अक्सर उसे सहारा देते हैं।
कैलेंडर कितनी बार अपडेट होता है?
दिन में कई बार। फिर भी आंकड़े जारी होने का समय कम नोटिस पर बदल सकता है, इसलिए किसी बड़े इवेंट के आसपास ट्रेड करने से पहले आधिकारिक साइट (केंद्रीय बैंक या सांख्यिकी दफ्तर) पर समय जांच लें।
बुनियादी बातें सीखें
और ट्रेडिंग टूल्स
पेज अपडेट: 15 अक्टूबर 2026