पूरा लेसन
कभी-कभी अच्छी खबर आने पर भी कीमत गिर जाती है। अक्सर वजह यह होती है कि खबर पहले से भाव में शामिल थी: बाजार को इसकी उम्मीद थी, इसलिए ऐलान से पहले ही कीमत बदल चुकी थी।
कीमतें उम्मीदों पर टिकी होती हैं। उन्हें हिलाता है सरप्राइज: जो हुआ और जिसकी लोगों को उम्मीद थी, उन दोनों के बीच का अंतर।
ट्रेडर उम्मीदों को नापते हैं। ब्याज दर फ्यूचर्स (वायदा) से संभावना निकाली जा सकती है, जैसे “कटौती की 90% संभावना”। नौकरियों और महंगाई के आंकड़ों के लिए अर्थशास्त्रियों के अनुमान पैमाना तय करते हैं।
99% संभावना वाली ब्याज दर कटौती पर बाजार में मुश्किल से हलचल होती है। वही कटौती 20% संभावना पर हो, तो शेयर उछल सकते हैं और करेंसी फिसल सकती है।
“अफवाह पर खरीदें, खबर पर बेचें”: 10 जनवरी 2024 को अमेरिकी रेगुलेटरों ने स्पॉट बिटकॉइन ETF को मंजूरी दी, और उससे पहले बिटकॉइन हफ्तों तक चढ़ता रहा। दो हफ्ते के अंदर यह अपने शिखर से करीब 20% गिर गया।
- आम गलती
भ्रम: “अच्छी खबर से कीमत हमेशा चढ़ती है।” अगर लोगों को इससे बेहतर की उम्मीद थी, तो नहीं। किसी कंपनी का मुनाफा 20% बढ़ने के बाद भी उसका शेयर गिर सकता है, अगर ट्रेडरों को 30% की उम्मीद थी।
- मुख्य बात
किसी भी इवेंट से पहले खुद से पूछें: उम्मीद क्या है, और सरप्राइज क्या होगा? बाजार इसी अंतर पर चलता है।
झटपट जांच
- “भाव में पहले से शामिल” का मतलब है…
- बाजार को इसकी पहले से उम्मीद है
- कीमत कानून से तय होती है
- कीमत ब्रोकर तय करता है
- बाजार को ज्यादा क्या हिलाता है?
- सरप्राइज
- उम्मीद के मुताबिक फैसला
- दोनों बराबर
- “अफवाह पर खरीदें, खबर पर बेचें” का मतलब है…
- खबर आते ही कीमत गिर सकती है
- बड़ी खबर के तुरंत बाद हमेशा खरीदें
- अफवाहें हमेशा सच निकलती हैं
- फ्यूचर्स के भाव ब्याज दर कटौती की 95% संभावना दिखा रहे हैं, और फेड कटौती करता है। आमतौर पर क्या होता है?
- कीमतें मुश्किल से हिलती हैं
- शेयर हमेशा जोरदार उछलते हैं
- करेंसी हमेशा आसमान छूती है
इस लेसन के शब्द
बाजार हिलाने वाली खबरें
- इकोनॉमिक कैलेंडर
- नॉन-फार्म पेरोल (NFP)
- महंगाई कैसे मापी जाती है
- FOMC का दिन
- बाज और कबूतर
- भाव में पहले से शामिल