पूरा लेसन
किसी देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है या सिकुड़ रही है, यह जानने के लिए लोग GDP देखते हैं: एक साल में बनी सभी चीजों और सेवाओं की कुल कीमत।
इसमें खर्च जोड़ा जाता है: परिवारों का (खपत), कारोबारों का (निवेश), सरकार का, फिर निर्यात जोड़कर आयात घटा दिया जाता है।
ग्रोथ यानी % में बदलाव। भारत (हाल में करीब 6% से 8% सालाना) और इंडोनेशिया (करीब 5%) जर्मनी या जापान जैसी अमीर अर्थव्यवस्थाओं से तेज बढ़ते हैं, जिनकी ग्रोथ अक्सर 2% से कम रहती है।
2020 में महामारी से दुनिया की अर्थव्यवस्था करीब 3% सिकुड़ी, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे गहरी वैश्विक आर्थिक मंदी थी। लगातार दो तिमाहियों तक GDP का सिकुड़ना आर्थिक मंदी पहचानने का एक आम नियम है।
बाजार सरप्राइज पर प्रतिक्रिया देते हैं: अनुमान से बेहतर GDP आमतौर पर उस देश की करेंसी और शेयरों को ऊपर ले जाती है; अनुमान से कमजोर आंकड़ा उन्हें गिरा सकता है।
- आम गलती
गलती: GDP को हर किसी की आमदनी समझ लेना। कोई देश बढ़ सकता है, जबकि बहुत सारे लोग खुद को पहले से गरीब महसूस करें। प्रति व्यक्ति GDP, और ग्रोथ का फायदा किस-किस तक पहुंचता है, यह भी मायने रखता है।
- मुख्य बात
GDP अर्थव्यवस्था का आकार है, और इसकी ग्रोथ रेट उसकी रफ्तार। बाजार अनुमान के मुकाबले आए सरप्राइज पर ट्रेड करते हैं।
झटपट जांच
- GDP क्या मापती है?
- किसी देश में बनने वाली हर चीज की कुल कीमत
- उसकी सरकार का खर्च
- उसके शेयर बाजार की वैल्यू
- आर्थिक मंदी पहचानने का एक आम नियम क्या है?
- लगातार दो तिमाहियों तक GDP का सिकुड़ना
- शेयर बाजार का एक बुरा दिन
- सोने में तेजी
- अनुमान से बेहतर GDP आने पर उस देश की करेंसी आमतौर पर…
- मजबूत होती है
- कमजोर होती है
- वैसी ही रहती है
- देश A हर साल 6% बढ़ता है और देश B 1%। इससे क्या पता चलता है?
- A की अर्थव्यवस्था ज्यादा तेजी से बढ़ रही है
- A का हर व्यक्ति B के लोगों से ज्यादा अमीर है
- B आर्थिक मंदी में है
इस लेसन के शब्द
दुनिया की अर्थव्यवस्था
- GDP में क्या-क्या गिना जाता है
- करेंसी के भाव क्यों बदलते हैं
- दुनिया डॉलर पर क्यों चलती है
- व्यापार और करेंसी
- चीन दुनिया को क्यों हिला देता है
- पैसे का आना-जाना
- आर्थिक मंदी
- डिमांड, सप्लाई और चक्र
- उभरते बाजार