पूरा लेसन
चीन को छींक आती है, तो कमोडिटी बाजारों को जुकाम हो जाता है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है, सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
कच्चा माल खरीदने में भी वह सबसे आगे है: दुनिया का करीब आधा तांबा और समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले लौह अयस्क का करीब 70% वही खरीदता है।
जब चीन में निर्माण तेज होता है, तो धातुओं के दाम चढ़ते हैं, और साथ में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, चिली का पेसो और ब्राजीली रियल जैसी निर्यातक देशों की करेंसी भी।
जब चीन की रफ्तार धीमी पड़ती है, जैसे 2021 के बाद जब वहां का प्रॉपर्टी बूम ढह गया, तो स्टील और तांबे की मांग घटती है, और ऑस्ट्रेलिया से इंडोनेशिया तक के निर्यातकों को इसका झटका लगता है।
चीन अपनी करेंसी युआन (रेनमिनबी) को अपने नियंत्रण में रखता है। हर सुबह वहां का केंद्रीय बैंक एक रेफरेंस रेट तय करता है, और देश के अंदर चलने वाला (ऑनशोर) युआन उसके दोनों तरफ सिर्फ 2% तक ही हिल सकता है।
- आम गलती
गलती: यह सोचना कि चीन सिर्फ चीनी शेयरों के लिए मायने रखता है। उसकी मांग से कच्चा तेल, धातुएं, पाम ऑयल और सोयाबीन चलते हैं, और उन्हें बेचने वाले देशों की करेंसी भी।
- मुख्य बात
चीन की ग्रोथ से कमोडिटी की मांग तय होती है। अगर आप धातुओं या कमोडिटी करेंसी पर नजर रखते हैं, तो चीन के आंकड़े जरूर देखें।
झटपट जांच
- जब चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अक्सर…
- कमजोर होता है
- बहुत मजबूत होता है
- बिल्कुल नहीं बदलता
- दुनिया भर में बिकने वाले किस माल का बहुत बड़ा हिस्सा चीन खरीदता है?
- तांबा और लौह अयस्क
- कॉफी और कोको
- सोना और चांदी
- युआन…
- रोज के रेफरेंस रेट के आसपास नियंत्रण में रहता है
- डॉलर के मुकाबले एक ही रेट पर फिक्स है
- बिना किसी दखल के पूरी तरह बाजार के भरोसे चलता है
- 2021 के बाद जब चीन का प्रॉपर्टी बाजार बैठ गया, तो दुनिया भर में किस पर चोट पड़ी?
- स्टील, तांबे और लौह अयस्क की मांग पर
- सिर्फ दुनिया भर की स्मार्टफोन बिक्री पर
- चीन के बाहर किसी पर नहीं
दुनिया की अर्थव्यवस्था
- GDP में क्या-क्या गिना जाता है
- करेंसी के भाव क्यों बदलते हैं
- दुनिया डॉलर पर क्यों चलती है
- व्यापार और करेंसी
- चीन दुनिया को क्यों हिला देता है
- पैसे का आना-जाना
- आर्थिक मंदी
- डिमांड, सप्लाई और चक्र
- उभरते बाजार