पूरा लेसन
फोन, गेम, विदेश की सैर: बहुत सी कीमतें एक्सचेंज रेट पर टिकी हैं, यानी एक करेंसी की कीमत दूसरी करेंसी में। तो यह रेट बदलता क्यों है?
अक्सर वजह होती है ब्याज दरें। जब कोई देश दूसरों से ज्यादा ब्याज देता है, तो निवेशक ज्यादा कमाने के लिए वहां पैसा भेजते हैं। इस खरीदारी से वह करेंसी चढ़ती है।
USD/JPY, जनवरी से अक्टूबर 2022। फेड ने अमेरिकी दरें तेजी से बढ़ाईं, जबकि जापान ने अपनी दरें जीरो के करीब रखीं। एक डॉलर करीब 115 येन से बढ़कर करीब 150 येन का हो गया। येन काफी कमजोर हो गया।
विदेश से आने वाला पैसा भी मायने रखता है। विदेश में काम करने वाले मेक्सिकन हर साल $60 अरब से ज्यादा घर भेजते हैं। इंडोनेशिया कोयले, पाम ऑयल और निकल से डॉलर कमाता है। इन डॉलरों को पेसो या रुपिया में बदलने से इन करेंसी को सहारा मिलता है।
चौंकाने वाली खबरें और डर करेंसी को तेजी से हिलाते हैं। अनुमान से कहीं बेहतर रोजगार के आंकड़े कुछ ही सेकंड में किसी करेंसी को ऊपर ले जा सकते हैं। घबराहट में पैसा अक्सर अमेरिकी डॉलर, येन और स्विस फ्रैंक की ओर भागता है।
- आम गलती
भ्रम: कमजोर करेंसी मतलब डूबता देश। हमेशा नहीं। 2022 के सस्ते येन ने जापान के लिए आयात महंगा कर दिया, लेकिन जापानी निर्यातकों को विदेश में हुई बिक्री पर ज्यादा येन मिलने लगे।
- मुख्य बात
करेंसी ब्याज दरों, देश में आते-जाते पैसे, चौंकाने वाली खबरों और डर के साथ चलती हैं। खुद से पूछें: पैसा कहां जाना चाहता है, और क्यों?
झटपट जांच
- अगर USD/JPY 140 से 150 हो जाए, तो येन…
- कमजोर हुआ
- मजबूत हुआ
- जस का तस रहा
- कोई केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाता है, जबकि बाकी अपनी दरें जस की तस रखते हैं। उसकी करेंसी आमतौर पर…
- मजबूत होती है
- कमजोर होती है
- वहीं टिकी रहती है
- दुनिया भर में घबराहट हो, तो पैसा अक्सर भागता है…
- डॉलर, येन और स्विस फ्रैंक की ओर
- छोटी, जोखिम भरी कंपनियों के शेयरों की ओर
- उभरते बाजारों की करेंसी की ओर
- विदेश में काम करने वालों का घर भेजा पैसा आमतौर पर…
- अपने देश की करेंसी को सहारा देता है
- अपने देश की करेंसी को कमजोर करता है
- कोई असर नहीं डालता
इस लेसन के शब्द
दुनिया की अर्थव्यवस्था
- GDP में क्या-क्या गिना जाता है
- करेंसी के भाव क्यों बदलते हैं
- दुनिया डॉलर पर क्यों चलती है
- व्यापार और करेंसी
- चीन दुनिया को क्यों हिला देता है
- पैसे का आना-जाना
- आर्थिक मंदी
- डिमांड, सप्लाई और चक्र
- उभरते बाजार