पूरा लेसन
भारत, इंडोनेशिया, ब्राजील, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम: उभरते बाजार वे अर्थव्यवस्थाएं हैं, जो अभी अमीर देशों की बराबरी करने में लगी हैं, और अक्सर तेजी से।
युवा आबादी, नए शहर और बढ़ती आमदनी का मतलब अमीर देशों से तेज ग्रोथ हो सकता है। यही बात रिटर्न की तलाश में लगे निवेशकों को खींचती है।
पेच यह है कि यहां उतार-चढ़ाव ज्यादा तेज होते हैं। जब दुनिया भर के निवेशक डरते हैं, या अमेरिका में दरें बढ़ती हैं, तो पैसा तेजी से बाहर निकलता है, करेंसी गिरती है और आयात महंगा हो जाता है।
असली उदाहरण: 1997 और 1998 का एशियाई संकट। एक डॉलर करीब 2.5 मलेशियाई रिंगिट से बढ़कर 4.5 रिंगिट के पार पहुंच गया (चार्ट देखें)। इंडोनेशियाई रुपिया की कीमत 80% से ज्यादा घट गई।
तब से कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार जमा किया है और अपनी करेंसी को बाजार के हिसाब से चलने दिया है, जिससे वे तूफानों को बेहतर ढंग से झेल पाती हैं।
- आम गलती
गलती: “तेज ग्रोथ का मतलब शानदार निवेश है।” ग्रोथ अक्सर पहले से भाव में शामिल होती है, और करेंसी के उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों की बढ़त को साफ कर सकते हैं।
- मुख्य बात
उभरते बाजार: ज्यादा ग्रोथ, ज्यादा उतार-चढ़ाव। भंडार, स्थिर नीतियां और अमेरिकी ब्याज दरें तय करती हैं कि झटके कितने तेज लगेंगे।
झटपट जांच
- भारत और ब्राजील को अक्सर क्या कहा जाता है?
- उभरते बाजार
- विकसित बाजार
- टैक्स हेवन
- उभरते बाजार आमतौर पर…
- तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है
- धीरे बढ़ते हैं, लेकिन बहुत स्थिर होते हैं
- विदेशी निवेशकों के लिए बंद होते हैं
- किसी उभरते बाजार को झटके झेलने में क्या मदद करता है?
- मजबूत भंडार और स्थिर नीतियां
- कर्ज चुकाने के लिए नोट छापना
- दरों को महंगाई से काफी नीचे रखना
- 1997 और 1998 के एशियाई संकट के दौरान इंडोनेशियाई रुपिया…
- डॉलर के मुकाबले अपनी ज्यादातर कीमत खो बैठा
- डॉलर के मुकाबले दोगुना मजबूत हो गया
- उसकी जगह अमेरिकी डॉलर आ गया
इस लेसन के शब्द
दुनिया की अर्थव्यवस्था
- GDP में क्या-क्या गिना जाता है
- करेंसी के भाव क्यों बदलते हैं
- दुनिया डॉलर पर क्यों चलती है
- व्यापार और करेंसी
- चीन दुनिया को क्यों हिला देता है
- पैसे का आना-जाना
- आर्थिक मंदी
- डिमांड, सप्लाई और चक्र
- उभरते बाजार