पूरा लेसन
खिलाड़ी अपने मैचों के रीप्ले देखते हैं। ट्रेडर ट्रेडिंग जर्नल के साथ यही कर सकते हैं। इससे हर ट्रेड, चाहे जीत हो या हार, एक सबक बन जाता है।
हर ट्रेड के लिए लिखें: किसमें ट्रेड किया, एंट्री क्यों ली, स्टॉप लॉस, टारगेट, साइज और नतीजा।
यह भी लिखें कि उस वक्त क्या महसूस हो रहा था: ऊब, डर, लालच या बदला लेने की चाह। भावनाएं नतीजों पर अपने निशान छोड़ जाती हैं।
20 या उससे ज्यादा ट्रेड के बाद पैटर्न ढूंढें। कौन-से सेटअप काम करते हैं? दिन का कौन-सा वक्त? क्या नुकसान के बाद नियम टूट जाते हैं?
उदाहरण: एक ट्रेडर अपने 30 ट्रेड दोबारा देखती है और पाती है कि उसके 10 सबसे बड़े नुकसानों में से 8 किसी दूसरे नुकसान के ठीक बाद हुए। एक नया नियम, दो नुकसान के बाद उस दिन ट्रेडिंग बंद, उसका सबसे बड़ा छेद भर देता है।
- आम गलती
गलती: सिर्फ जीत वाले ट्रेड लिखना। सबसे काम की जानकारी नुकसान वाले ट्रेड में छिपी होती है। जिस जर्नल में ईमानदारी न हो, वह बस एक स्क्रैपबुक है।
- मुख्य बात
हर ट्रेड लिखें, हर हफ्ते जर्नल दोबारा पढ़ें, और एक बार में एक गलती सुधारें।
झटपट जांच
- ट्रेडिंग जर्नल में लिखा जाता है…
- वजह, स्टॉप लॉस, टारगेट, नतीजा और भावनाएं
- सिर्फ जीत वाले ट्रेड
- सिर्फ मुनाफा या नुकसान
- पैटर्न कब ढूंढने चाहिए?
- कई ट्रेड हो जाने के बाद
- कभी नहीं
- सिर्फ एक ट्रेड के बाद
- सबसे ज्यादा सुधार आता है…
- बार-बार होने वाली सबसे बड़ी गलती सुधारने से
- और ज्यादा बार ट्रेड करने से
- बिल्कुल नई स्ट्रैटेजी ढूंढने से
- नुकसान वाले ट्रेड को विस्तार से क्यों लिखें?
- इनसे वे गलतियां दिखती हैं, जिन्हें सुधारा जा सकता है
- कानून के मुताबिक ब्रोकर यह मांगता है
- ताकि पैसा जल्दी वापस जीता जा सके
ट्रेडिंग साइकोलॉजी
- नुकसान ज्यादा क्यों चुभता है
- फूल बेचे, कांटे रखे
- ओवरकॉन्फिडेंस
- जुआरी की गलतफहमी
- FOMO और दिमाग के दूसरे जाल
- टिल्ट और रिवेंज ट्रेडिंग
- अपना ट्रेडिंग प्लान
- ट्रेडिंग जर्नल रखें