पूरा लेसन
1981 की एक मशहूर स्टडी में, जिन अमेरिकी छात्रों से पूछा गया, उनमें से करीब 93% ने खुद को औसत से बेहतर ड्राइवर बताया। सभी तो सही नहीं हो सकते।
यही है ओवरकॉन्फिडेंस (जरूरत से ज्यादा भरोसा): अपने हुनर या जानकारी को असल से बेहतर मानना। ट्रेडिंग में यह बहुत बार और बहुत बड़े ट्रेड लेने के रूप में दिखता है।
अर्थशास्त्री ब्रैड बार्बर और टेरेंस ओडीन ने 1991 से 1996 तक अमेरिका के 66,465 परिवारों के निवेश की स्टडी की। सबसे ज्यादा ट्रेड करने वाले 20% परिवारों ने खर्च काटकर सालाना 11.4% कमाया, जबकि बाजार का रिटर्न 17.9% रहा।
वजह: पक्का यकीन होने पर ट्रेड ज्यादा होते हैं। हर ट्रेड पर स्प्रेड और फीस लगती है, और ये खर्च रिटर्न खा जाते हैं।
- आम गलती
भ्रम: “इस ट्रेड पर मुझे 90% यकीन है।” सच: जिन जवाबों पर लोग “90% यकीन” जताते हैं, वे 90% से कहीं कम बार सही निकलते हैं। यकीन होना सबूत नहीं है।
- मुख्य बात
फैसला ट्रेडिंग जर्नल को करने दें, याददाश्त को नहीं। असली नतीजे बताते हैं कि आपकी ताकत कहां है और कमजोरी कहां।
झटपट जांच
- ओवरकॉन्फिडेंट ट्रेडर अक्सर…
- बहुत बार और बहुत बड़े ट्रेड करते हैं
- बहुत कम और बहुत छोटे ट्रेड करते हैं
- खुद फैसला लेने के बजाय दूसरों की नकल करते हैं
- अमेरिकी परिवारों वाली स्टडी में, सबसे ज्यादा ट्रेड करने वालों की कमाई…
- बाजार से कम रही
- बाजार से करीब दोगुनी रही
- ठीक बाजार जितनी रही
- ओवरकॉन्फिडेंस का सबसे अच्छा इलाज है…
- असली नतीजों वाला जर्नल
- ज्यादा स्क्रीन और इंडिकेटर
- बड़ा ट्रेडिंग अकाउंट
- किसी ट्रेड पर आपको 90% यकीन है। यह एहसास…
- इस बात का सबूत नहीं कि आप सही हैं
- बताता है कि बड़ा ट्रेड लेना चाहिए
- बताता है कि स्टॉप की जरूरत नहीं
इस लेसन के शब्द
ट्रेडिंग साइकोलॉजी
- नुकसान ज्यादा क्यों चुभता है
- फूल बेचे, कांटे रखे
- ओवरकॉन्फिडेंस
- जुआरी की गलतफहमी
- FOMO और दिमाग के दूसरे जाल
- टिल्ट और रिवेंज ट्रेडिंग
- अपना ट्रेडिंग प्लान
- ट्रेडिंग जर्नल रखें