पूरा लेसन
पायलट हर उड़ान से पहले चेकलिस्ट पूरी करते हैं, मौसम साफ हो तब भी। ट्रेडिंग प्लान आपकी चेकलिस्ट है, जिसे बाजार के हड़बड़ी मचाने से पहले ही लिख लिया जाता है।
ट्रेडिंग प्लान क्लिक करने से पहले चार सवालों के जवाब देता है: क्या, कब, कितना, और कहां निकलना है।
क्या और कब: किन बाजारों और सेटअप में ट्रेड करना है, किन घंटों में, और किन खबरों से दूर रहना है। उदाहरण: “सिर्फ EUR/USD, अमेरिका के बड़े आंकड़ों के आसपास के 30 मिनट में कभी नहीं।”
कितना: जोखिम के पक्के नंबर, जिनसे पोजीशन साइज तय होता है। उदाहरण: “हर ट्रेड पर 1% जोखिम। दिन में -3% होते ही ट्रेडिंग बंद।”
कहां निकलना है: स्टॉप लॉस और टारगेट, दोनों एंट्री से पहले तय। कीमत इनमें से किसी को भी छुए, फैसला प्लान करेगा, आपका मूड नहीं।
- आम गलती
भ्रम: “बाकी सब ट्रेड खुलने के बाद तय होगा।” सच: चलते ट्रेड में डर और लालच सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं। एंट्री से पहले लिए गए फैसले ही ठंडे दिमाग के फैसले होते हैं।
- मुख्य बात
प्लान लिखें, उस पर चलें और जर्नल की मदद से उसे बेहतर बनाएं। जिस प्लान पर अमल न हो, वह बस एक ख्वाहिश है।
झटपट जांच
- ट्रेडिंग प्लान कब लिखा जाता है?
- ट्रेड करने से पहले
- किसी बड़े नुकसान के बाद
- प्रोफेशनल बनने के बाद ही
- प्लान में “कितना” का मतलब है…
- हर ट्रेड और हर दिन का जोखिम
- जितना मुनाफा कमाने की उम्मीद है
- अकाउंट का कुल बैलेंस
- स्टॉप कहां लगेगा, यह कब तय करना चाहिए?
- एंट्री से पहले
- जब ट्रेड घाटे में हो
- खबरें पढ़ने के बाद
- प्लान कहता है कि अमेरिका के बड़े आंकड़ों के आसपास ट्रेड नहीं करना। NFP 10 मिनट में आने वाला है। अब…
- आंकड़े आने तक इंतजार करें
- अभी एक झटपट ट्रेड खोलें
- दोगुने साइज से ट्रेड करें
इस लेसन के शब्द
ट्रेडिंग साइकोलॉजी
- नुकसान ज्यादा क्यों चुभता है
- फूल बेचे, कांटे रखे
- ओवरकॉन्फिडेंस
- जुआरी की गलतफहमी
- FOMO और दिमाग के दूसरे जाल
- टिल्ट और रिवेंज ट्रेडिंग
- अपना ट्रेडिंग प्लान
- ट्रेडिंग जर्नल रखें