पूरा लेसन
कोई एक निवेश चुनने से पहले एक बड़ा सवाल है: कितना पैसा सुरक्षित एसेट में जाए और कितना ग्रोथ वाले एसेट में? आपके पोर्टफोलियो का यही बंटवारा आपका एसेट एलोकेशन है।
सबसे अहम है आपकी समय-सीमा। जिस पैसे की 20 साल तक जरूरत नहीं, वह गिरावटें झेल सकता है, इसलिए उसमें ग्रोथ वाले एसेट, जैसे इक्विटी फंड, ज्यादा हो सकते हैं। अगले साल काम आने वाला पैसा यह जोखिम नहीं उठा सकता।
2008 में अमेरिकी शेयर (S&P 500) करीब 37% गिरे, जबकि अमेरिकी बॉन्ड करीब 5% चढ़े। 60% शेयर और 40% बॉन्ड वाले मिक्स में करीब 20% का नुकसान हुआ: तकलीफदेह, लेकिन कहीं कम।
इमरजेंसी फंड और अगले एक-दो साल के लिए रखा पैसा आमतौर पर इस मिक्स से बाहर रहता है, सेविंग्स अकाउंट या FD जैसी सुरक्षित जगहों पर।
बाजार धीरे-धीरे आपके मिक्स को तय लक्ष्य से भटका देता है। इसलिए कई निवेशक साल में एक बार रीबैलेंसिंग करते हैं: हर हिस्से को वापस उसी बंटवारे पर ले आते हैं जो उन्होंने चुना था।
- आम गलती
भ्रम: “कोई परफेक्ट मिक्स होता है और उसे ढूंढना ही है।” जिस आसान मिक्स पर आप क्रैश में भी टिके रह सकें, वह उस होशियारी से बने मिक्स से बेहतर है जिसे आप घबराहट में छोड़ दें।
- मुख्य बात
एसेट एलोकेशन का मतलब है पैसे को सुरक्षित और ग्रोथ वाले एसेट के बीच बांटना। यह बंटवारा आपका लक्ष्य और आपकी समय-सीमा तय करते हैं, आज की खबरें नहीं।
झटपट जांच
- एसेट एलोकेशन का मतलब है…
- पैसे को अलग-अलग तरह के एसेट में बांटना
- कोई एक लोकप्रिय शेयर चुनना
- अंदाजा लगाना कि बाजार कब पलटेगा
- रीबैलेंसिंग का मतलब है…
- हर हिस्से को वापस उसके लक्ष्य पर लाना
- क्रैश में सब कुछ बेच देना
- तेजी से बढ़ने के लिए लीवरेज जोड़ना
- सबसे अच्छा प्लान वह है जिस पर आप…
- क्रैश में भी टिके रह सकें
- हर दिन बदल सकें
- बनाकर भूल जाएं और कभी न देखें
- आमतौर पर कौन ज्यादा ग्रोथ वाले एसेट रख सकता है?
- 30 साल बाद के लिए बचत करने वाला
- अगले महीने फोन खरीदने वाला
- अगले हफ्ते किराया चुकाने वाला
इस लेसन के शब्द
निवेश की बुनियादी बातें
- निवेश या ट्रेडिंग?
- कंपाउंडिंग: बढ़त पर बढ़त
- बाजार में टिके रहने की ताकत
- इंडेक्स और ETF
- म्यूचुअल फंड
- बूंद-बूंद जुड़ते खर्च
- सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें
- आसान पोर्टफोलियो कैसे बनाएं
- पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग
- तेजी और मंदी का बाजार
- डिविडेंड वाले शेयरों में निवेश